ओ नदी दुनिया तुम्हें

ओ नदी दुनिया तुम्हें

जा रही हो प्यास का अपमान करके
ओ नदी दुनिया तुम्हें क्या क्या कहेगी ?
हाल जीवन मरण का किससे कहेंगे ?
ये किनारे अब व्यथा किससे कहेंगे ?
जाल डालेगा मछेरा किस लहर पर?
डाल के पंछी कथा किससे कहेंगे ?
डूब जाओ जाओ मत स्नान करके
ओ नदी दुनिया तुम्हें क्या क्या कहेगी ?
प्यार करना और करके छोड़ देना,
मैंने सीखा ही नही मुँह मोड़ लेना,
तुमने सीखा दिल जहाँ पत्थर बनाना
मैंने सीखा पत्थरों को तोड़ लेना,
मौन हूँ बस दर्द का अनुमान करके
ओ नदी दुनिया तुम्हें क्या क्या कहेगी।
साथ आया कौन जग में साथ जाये,
साथ रहने के नियम हमने बनाए
दिल तो मरुथल ही दिया परमात्मा ने,
प्यार के दो फ़ूल तो हमने खिलाए,
जाओगी उपवन को रेगिस्तान करके,
ओ नदी दुनिया तुम्हें क्या क्या कहेगी।

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